Thursday, November 1, 2018

शंख का महत्व (shankh ka vaigyanik aur dharmik mahatva in hindi )


      
 शंख का महत्व (shankh ka vaigyanik aur dharmik mahatva in hindi )

      हिन्दू धर्म में शंख का विशेष महत्व है। सनातन धर्म में प्राचीन काल से ही शंख को पूजा - पाठ एवं सुख
      समृद्धि के लिए उपयोग किया जाता रहा है। हम सब बचपन से मंदिरो में घरो में आरती एवं पूजा में शंख
      का प्रयोग देखते आ रहे है। यह एक ऐसी परम्परा बन चुकि है ,जिसका सैकड़ो वर्षो से पालन किया जा
      रहा है।

      किन्तु आज की युवा पीढ़ी शायद ही धार्मिक महत्व की इन वस्तुओं का प्रयोग करना जानती होंगी या
      उनके फायदों से परिचित होंगी। आज हम अपनी धार्मिक परम्पराओं से दूर होते चले जा रहे हैं। प्राचीनकाल
      में हमारे ऋषि मुनियों ने जिन परम्पराओं का विकास किया था ,वह पूर्णतः वैज्ञानिक आधार पर किया था।
      तथा समाज कल्याण एवं सनातन धर्म की रक्षा के उदेश्यों से किया गया था।

      इसीलिए आज हमारा यह कर्तव्य हो जाता है , की हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को इन नियमों से एवं
      उनके वैज्ञानिक महत्व से परिचित करवाये। ताकि वे भी उनका लाभ उठा कर अच्छा जीवन बीता सके।
      इसी क्रम में आज हम शंख के धार्मिक ,सामाजिक एवं वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालने ,तथा हमारे
      स्वास्थ्य , सुख - समृद्धि में उसके योगदान पर बात करेंगे।

     1. शंक का धार्मिक महत्त्व ( shankh ka mahatva in hindi ):

      हिन्दू वेदों एवं पुराणों के अनुसार शंख की उत्पति समुद्र मंथन से हुई है। समुद्र मंथन में प्राप्त 14 रत्नों 
      में से एक शंख भी है।  समुद्र मंथन से निकलने के पश्चात भगवान विष्णु द्वारा इसे धारण किया गया। 
      शंख के आगे के हिस्से में सूर्य एवं वरूण देव का वास होता है। जो घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते है। 
      पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शंख को लक्ष्मीजी का भाई माना जाता है। इसलिए जहाँ पर शंख की 
      पूजा की जाती है या उसे बजाया जाता है ,वहाँ पर स्वयँ लक्ष्मीजी का वास होता है। एवं सुख - समृद्धि की 
      प्राप्ति होती है। जिस घर में शंख की स्थापना की जाती है। अथवा नियमित रूप से सुबह - शाम उसे बजाया 
      जाता है , वहाँ सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। 

      2. शंख के प्रकार ( Types of shankh ) :

       शंख मुख्य रूप से तीन प्रकार के पाय जाते है।  1 .  दक्षिणावर्ती शंख  2 .  मध्यावर्ती शंख 
       3 . वामावर्ती शंख  

       इनके अलावा इनके कई उप प्रकार भी पाए जाते है। 
       जैसे  : लक्ष्मी शंख , गोमुखी शंख , कामधेनु शंख , विष्णु शंख , देव शंख , चक्र शंख , सुघोष शंख ,
       गरुड़ शंख , मणिपुष्पक शंख , राक्षस शंख , कछप शंख , पांचजन्य शंख , अन्नपूर्णा शंख , मोती शंख 
       हीरा शंख , शेर शंख आदि। 

       इन सभी में दक्षिणावर्ती शंख अत्यन्त दुर्लभ होता है। दक्षिणावर्ती शंख को साक्षात लक्ष्मीजी का 
       स्वरुप माना गया है।  अगर आपके घर में दक्षिणावर्ती शंख है ,तो आप के यहाँ लक्ष्मीजी का सदा वास 
        रहता है। 

       3. स्वास्थ्य के लिए लाभ  ( Health Benefits of Sankh ) :

       शंख में गंधक ( Sulfur ), फॉस्फोरस ( Phosphorus )और कैल्शियम ( Calcium ) प्रचुर मात्रा में पाया            जाते है। इसलिए यह हमारे स्वास्थ्य के लिए विशेष लाभदायक है। शंख में रखे हुए जल को पीने से शरीर
       में कैल्शियम की कमी पूरी होती है। हिन्दू धर्म में पूजा के समय शंख में जल भरकर रखा जाता है। एवं 
       पूजा के पश्चात जल का आचमन किया जाता है। 

       इसके अलावा शंख का उपयोग अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में किया जाता है। 
       आयुर्वेद के अनुसार शंख भस्म ( Shankh Bhasma ) से पेट की बीमारियां , पीलिया ,पथरी  एवं 
       यकृत की बीमारियों को ठीक किया जाता है। 

       शंख बजाना फेफड़ो एवं हार्ट के लिए लाभदायक है  :

       शंख बजाने की जो प्रक्रिया है। जिसमे शंख को मुँह के पास रखकर उसमें जोर से हवा प्रवाहित की जाती 
       है। इस क्रिया में हमारे फेफड़ो एवं हार्ट का व्यायाम हो जाता है। शंख बजाने के लिये जब हम अपने फेफड़ो 
       को फुलाकर उसमें ज्यादा हवा भरते हैं। इससे हमारे फेफड़ो की कार्य क्षमता बढ़ जाती है। एवं शरीर में
       शुद्ध ऑक्सीजन ( Oxygen ) का प्रवाह बढ़ जाता है। जो स्वास्थ्य के लिये बहुत लाभदायक है। नियमित
       शंख बजाने वाले व्यक्ति को हार्ट एवं फेफड़ो से सम्बंधित बीमारियां नहीं होती हैं। 

      

      4.  शंख का वैज्ञानिक महत्व ( shankh aur Vigyan ) :

       1928 में बर्लिन यूनिवर्सिटी ने शंख ध्वनि का अनुसंधान करके यह सिद्ध किया की इसकी ध्वनि में
        कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता है। शंख बजाने के दौरान उससे जो ध्वनि तरंगे उत्पन्न होती है।
        उनसे वातावरण में मौजूद अनेक बीमारियों के कीटाणु नष्ट हो जाते है। एवं वातावरण शुद्ध हो जाता है।
        शंख की ध्वनि हमारे मन से बुरे विचारो को निकालने में सहायक है। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह सिद्ध
        हो चुका है की सूर्य की किरणे शंख की ध्वनि तरंगो में बाधक है। इसीलिए हिन्दू मान्यताओं के अनुसार
        सुबह एवं शाम को शंख बजाने की परम्परा है। इस समय सूर्य की किरणे निस्तेज होती है। तथा शंख
        ध्वनि अधिक दूर तक जाकर वातावरण को स्वच्छ कर पाती है। 
      

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