Sunday, December 23, 2018

सुबह जल्दी उठने के चमत्कारिक फायदे ( Morning Good Habits )



    सुबह जल्दी उठने के चमत्कारिक फायदे 

प्रातःकाल उठने के लाभ
सुबह जल्दी उठने के फायदे


      आजकल की भागदौड़ भरी जिन्दगी में हमारी दिनचर्या पूरी तरह से बदल गई है। जिसका सीधा असर 
      हमारे स्वास्थ्य पर पड़ने लगा है। एवं कम उम्र में ही हमारे शरीर में कई प्रकार की गम्भीर व्याधिया 
      उत्पन्न होने लगी है। जिसका प्रमुख कारण है ,हमारी अव्यवस्थित जीवनशैली एवं खानपान। 

      आज हम आधुनिकता  एवं पाश्चात्य की चकाचौंध में हमारे प्राचीन एवं वैज्ञानिक नियमों को मानने को 
      तैयार नहीं है। किन्तु सत्य तो यही है ,की हमारी सांस्कृतिक विरासत बहुत सम्पन्न है। आयुर्वेद द्वारा 
      मनुष्य जीवन के लिये जो दैनिक नियम बनाये गए थे ,वह पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर बनाये गये थे। 
      इन्हीं में से एक नियम जिसका पालन हमारे पूर्वजो द्वारा सदियों से किया जाता रहा है। वह है सुबह जल्दी
      उठने का नियम जिसे आयुर्वेद के अनुसार स्वस्थ्य दिनचर्या एवं उत्तम स्वास्थ्य के लिए जरुरी माना गया
      है। सूर्योदय से पूर्व उठाना हमारे लिए चमत्कारिक रूप से फायदेमंद है।


     सुबह जागने के लिए ब्रह्ममुहूर्त  का समय सबसे उत्तम है। :

      हिन्दू धर्म में हमारे ऋषि - मुनियो ने सुबह जागने के लिए ब्रह्ममुहूर्त को श्रेष्ठ माना है। आयुर्वेद के 
      अनुसार भी ब्रह्ममुहूर्त में जागना हमारे स्वास्थ्य के लिये बहुत लाभकारी है। ब्रह्ममुहूर्त में उठने वाले 
      व्यक्ति को शारीरिक बल , बुद्धि ,ओज ,लम्बी आयु एवं सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है। सुबह जल्दी उठना 
      हमारे लिए कितना लाभदायक है , इसकी कल्पना भी हम नहीं कर सकते। सुबह सूर्योदय से पूर्व जागने से 
      हमारे सम्पूर्ण व्यक्तित्व में सकारात्मक परिवर्तन आते है। मनोबल ऊपर उठता है। तथा जीवन में नई 
      ऊर्जा का संचार होता है। 

      शस्त्रों के अनुसार रात्रि का चौथा प्रहर ब्रह्ममुहूर्त कहलाता है। अर्थात सूर्योदय से 1.30 से 2 घंटे पहले का 
      समय ब्रह्ममुहूर्त कहलाता है। आमतौर पर सुबह 4.30 से 5.30 का समय ब्रह्ममुहूर्त का होता है। हमें इस 
      बीच में बिस्तर छोड़ देना चाहिए। तथा अपने नित्यकर्मों जैसे शौच एवं स्नान से मुक्त हो जाना चाहिये। 
      

                         सफलता के मूलमंत्र ( Success Mantra In Hindi )

     सुबह की वायु है प्राणदायक :

प्रात काल उठने के फायदे
सुबह जल्दी उठने के चमत्कारिक फायदे

      सुबह 4 से 7बजे  के  समय के बीच में हवा की क्वालिटी पूरे दिन की अपेक्षा सबसे बेहतर रहती है। इस 
      समय की हवा प्रदूषण मुक्त एवं स्वच्छ रहती है। इसीलिए यह समय प्राणायाम एवं योग के लिए सबसे 
      उत्तम माना गया है।  सुबह ( Morning ) की सैर के लिये भी यह वक्त बहुत अच्छा है। इससे हमारे शरीर          में ऊर्जा का संचार होता है। तथा मन प्रसन्न हो जाता है। योग एवं मेडिटेशन ( Yoga & Meditation ) 
      के लिए भी सुबह का वक्त सबसे बेहतर है। अगर हम प्रातः जल्दी जाग जाते है तो सारा दिन हमारे शरीर
      में  स्फूर्ति एवं ताजगी बनी रहती है

      कब्ज़  एवं पेट की समस्याओं में लाभकारी है सुबह जल्दी उठना :

       आज के दौर में बहुत तेजी से फैलने वाली एक बीमारी है। जिसने आज हर दूसरे - तीसरे व्यक्ति को अपना 
       शिकार बना लिया है। वह है , कब्ज या पेट साफ ना होना। इसका प्रमुख कारण है आजकल की आधुनिक 
       जीवनशैली। आजकल हमारा खान - पान इस तरह का हो गया है जो इस समस्या को दिन पर दिन और 
       बड़ा रहा है। कब्ज 95 % बीमारियों की जड़ है। अगर हमारा पेट साफ नहीं होगा तो कई तरह की बीमारियां 
       आगे चलकर शरीर में होंगी। पेट साफ ना होने का एक कारण है , सुबह देर से उठना।

       आयुर्वेद के अनुसार हमारे शरीर में तीन प्रकार की प्रवृतिया पाई जाती है। कफ , पित और वायु। सम्पूर्ण
       24 घंटे में हमारे शरीर में इनका अलग - अलग प्रभाव रहता है। सुबह के समय हमारे शरीर में कफ की
       प्रवृति प्रबल होती है। उसके पश्चात जैसे - जैसे सूरज चढ़ने लगता है ,हमारे शरीर में कफ का प्रभाव कम
       होने लगता है। और पित का प्रभाव बढ़ने लगता है। शाम होते ही पित का प्रभाव कम हो जाता है और वायु
       का प्रभाव बढ़ने लगता है।

       चूँकि कफ का प्रभाव सुबह - सुबह ही ज्यादा रहता है। और कफ की प्रवृति चिकनाहट भरी होती है। इसी
       कारण सुबह के समय मल विसर्जन की प्रक्रिया आसान हो जाती है। तथा पेट पूरी तरह साफ हो जाता है।
       इसके बाद जैसे - जैसे समय बढ़ता जाता है। पित की प्रवृति बढ़ने के कारण आंतो में मौजूद मल सुखकर
       कठोर हो जाता है। और कब्ज उत्पन्न हो जाता है।

       सूर्योदय से पहले उठकर अगर हम इन कार्यो से मुक्त हो जाते है , तो हमें कभी कब्ज़ ,पेट साफ ना होना ,
       गैस और बदहज़मी जैसी शिकायते नहीं होंगी। एवं पूरा दिन स्फूर्ति और ऊर्जा के साथ गुजरेगा।


      सुबह जल्दी उठकर हम सभी कार्य समय पर पूरे कर पाएंगे :


      आजकल की भागदौड़ भरी जीवनशैली में हर मनुष्य को रोजाना कई प्रकार के कार्य करना पड़ता है।
      आपका जो भी पेशा हो आपको पैसा कमाने के लिये रोजाना काम करना ही है। इसी के लिए व्यक्ति 
      सुबह से शाम तक दौड़ता रहता है। फिर बहुत से जरुरी काम समय की कमी के कारण छूट जाते है। 
      जिसका सीधा असर हमारी तरक्की एवं कमाई पर पड़ता है। 
    
      अगर हम अपने दिन की शुरुआत सामान्य लोगों से 2-3 घंटे पहले कर देते है , तो हम रोज कुछ 
      अतिरिक्त समय निकाल पायेंगे। जिसका उपयोग हम अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाने में कर सकते है। 
      हमें किसी भी कार्य को कल पर टालना नहीं पड़ेगा। इसके अलावा हम अपने परिवार एवं बच्चों के लिए 
      समय भी निकाल पायेंगे। हमारे दिनभर के कार्य अगर समय पर हो जायेंगे तो हमें मानसिक शांति भी 
      प्राप्त होगी। इससे हमारा मनोबल बढ़ेगा। 


     जीवन में सफलता पाना है तो सुबह जल्दी उठे :

morning walk in hindi
सुबह जल्दी उठने के चमत्कारिक फायदे

     क्या आप जानते है ,जितने भी सफल व्यक्ति है। जिनका नाम हम जानते है। जिन्होंने अपनी जिन्दगी 
     में सफलता की ऊचाँइयों को छुआ है। और अपने देश और व्यापार का नाम सारी दुनिया में पहुँचाया है। 
     उन सबमे एक आदत सामान है। वह सभी सुबह जल्दी उठ जाते है। ज्यादातर सभी सफल व्यक्ति अपने 
     दिन की शुरुआत सुबह 4 या  5 बजे कर देते है। सभी मशहूर हस्तियों की आदत होती है ,सुबह जल्दी उठना। 
     बहुत सारे लोग अपनी सफलता का श्रेय उनकी सुबह जल्दी उठने की आदत को देते है। 
  
     सभी बड़े - बड़े बिजनेसमैन ,फ़िल्मस्टार ,खिलाड़ी राजनेता और डॉक्टर ये सभी सुबह जल्दी उठने के 
     फायदों को जानते हैं। और सुबह जल्दी उठकर व्यायाम ,योग ,मेडिटेशन करने के पश्चात पूरे दिन की 
     योजनाएँ बनाते है। 


    सुबह जल्दी उठने से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे :


     सुबह जल्दी उठकर आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते है। आप खुद प्रयोग करके देखें 
    अगर आप की आदत देर तक सोने की है ,तो आप कुछ दिन सुबह 5-6 बजे के बीच उठ जाइये। कम से कम 
    एक हफ्ता आप इस प्रयोग को करके देखिये। आपको अपने जीवन में ख़ुद ब ख़ुद बदलाव महसूस होगा। 
    आप में ऊर्जा का स्तर बढ़ जाएगा। आप का मन प्रसन्नचित रहेगा। आपका हौसला बढ़ेगा। 

    सुबह उठने के इतने ज़्यादा फ़ायदे है जिन्हें गिनाया नहीं जा सकता। सूर्योदय से पहले जगाने से मनुष्य के 
    सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास होता है। आप अपने आप सफलता के पथ पर आगे बढ़ने लगेंगे। आपकी 
    शारीरिक घड़ी सही तरह से काम करने लगेगी। रात में नींद अच्छी आयेगी। 

   सुबह जल्दी उठने की आदत कैसे डाले :

   कुछ लोगों की शिकायत यही रहती है , हम सब जानते है। उन्हें यह भी पता है की सुबह जल्दी उतने के 
   बहुत सारे फ़ायदे है। वे उठना भी चाहते है। किन्तु चाहकर भी नियम नहीं बना पाते। या फिर एक दो दिन 
   या हफ़्ते भर में नियम टूट जाता है। फिर वही पुरानी जीवनशैली चालू हो जाती है। इसके लिये क्या किया 
   जाय। क्योंकि आजकल की प्रतिस्पर्धा भरी जीवनशैली ही कुछ ऐसी है ,की ना चाहते हुए भी आपको कभी 
    कभी 11-12 बजे तक जागना ही पड़ता है। और इसी कारण सुबह नींद नहीं खुल पाती। तो क्या किया जाए। 

    इसके लिए आप कुछ तरीके अपना सकते है। :-

    1 . आप को दृढ़ संकल्प करना होगा की आप को सुबह उठना ही है चाहे कुछ भी हो जाए। 

    2.  रात में सोने से पहले आँखे बंद करके अपने मन में कहिये की मुझे सुबह 5-6 बजे उठना है। 

    3.  रात में सोने का समय निर्धारित कर लीजिये ,वह समय 12 बजे से पहले का होना चाहिये। 

    4.  सोने के निर्धारित समय से ज्यादा आपको किसी भी हालत में नहीं जागना है। 

    5. दोपहर के खाने के पश्चात 10 -15 मिनिट की एक छोटी सी झपकी ले। इसके और भी बहुत सारे फ़ायदे 
       मिलेंगे। 

    6. अगर सुबह उठने का आपका नियम किसी दिन टूट भी गया तो निराश ना हो। और उसे वही पर छोड़े 
        नहीं। यही गलती ज्यादातर लोग करते है। अगले दिन से फिर से अपने नियम पर आ जाइये। 

     7. कम से कम 90 दिनों तक आप इस क्रम को द्रड़ता पूर्वक जारी रखें। 


     इन नियमों का पालन करके आप आसानी से सुबह उठने की आदत डाल सकते है। 
       


       

       

      


      

Monday, November 19, 2018

अभी नहीं तो कभी नहीं (motivational speech in hindi for business )

                        

                                              

       अभी नहीं तो कभी नहीं (motivational speech in hindi for                   business )

                 

        इस दुनिया में हर व्यक्ति के कुछ ना कुछ सपने होते है। की वह अपनी जिंदगी में क्या करना चाहता है। 
        अपने आप को किस मुकाम पर देखना चाहता है। क्या हासिल करना चाहता है। 
      
         और इसके लिए वह हमेशा प्रयास करता रहता है। अपने आप को उस मुकाम पर पहुँचाने के लिए। 
         अपने सपनो को साकार करने के लिये हम सबके मन में कुछ विचार या आइडिया आते है। 
         की मै किस क्षेत्र में काम करना चाहता हूँ, कौन सा व्यवसाय करना चाहता हूँ। या कुछ ऐसा काम जो 
         मुझे मेरे सपने तक पहुँचा दे। जैसे कोई संगीत में अपना कॅरियर ( Career ) बनाना चाहता है , तो कोई
         क्रिकेट ( Cricket ) में नाम कामना चाहता है। और कोई बहुत बड़ा बिजनेसमैन ( Businessman )
         बनाना चाहता है। इस दुनिया में हजारो लाखों लोगों के हजारो लाखों सपने या आइडिया होते है।

         पर आपको यह जानकर आश्चर्य होगा की इनमें से केवल 5 प्रतिशत लोग ही अपने सपने या लक्ष्य को
         प्राप्त कर पाते है। बाकी के 95 प्रतिशत लोग अपनी पूरी जिन्दगी अपने आइडिया या सपने को मन में
         लेकर जीते है और अपने मन में लेकर ही मर जाते है।

         उसे कभी भी अपने मन से निकालकर धरातल पर नहीं ला पाते है। आप ने कभी सोचा है ,ऐसा क्यों होता
         है। और उन 5 प्रतिशत लोगों ने ऐसा क्या किया जो वह अपने सपने को सफल बना पाए या उन 95 
         प्रतिशत लोगों ने क्या नहीं किया जो वह अपने सपने को दिल में लेकर ही इस दुनिया से चले गये।

         नहीं ! शायद हम में से किसी ने यह नहीं सोचा होगा। क्योकि हमें कभी यह अहसास ही नहीं हो पाता है।
         की हम अपनी आत्मा को दबा रहे है क्योकी हमारा सामाजिक जीवन ही इस प्रकार से बुना गया है की
         हम उन रूढ़िवादी परम्पराओं को कभी तोड़ ही नहीं पाते है। जो हमारी सफलता में बाधक है। हमारे
         समाज ने मनुष्य जीवन का कुछ ऐसा साचा सा बना रखा है। जिसके अनुसार हमें अपने को ढ़ालना ही
         पड़ता है। और अगर कोई उससे बाहर निकलना चाहता है तो समाज उसे स्वीकार नहीं करता है।

         इसके लिए अगर कोई सबसे ज्यादा जिम्मेदार है ,तो वह व्यक्ति खुद है। जो लोगो या समाज के या
         अन्य किसी डर के कारण कभी शुरुआत ही नहीं कर पाता है। दोस्तों यह जीवन का सबसे कड़वा सच है।
         की आप अगर कुछ हटकर नया करना चाहते है तो शुरुआत आपको अकेले ही करनी होगी। अकेले ही
         चलना होगा। शायद एक या दो लोग जो आपके बहुत ज्यादा शुभचिंतक या फिर करीबी है। आपका
         साथ दे सकते है। बस इससे ज्यादा की आपको उम्मीद नहीं रखनी होगी।

         क्योकि यह समाज कुछ इस तरह से बना है। की यह जब आप सफल हो जाएंगे ,कुछ करके दिखा देंगे
         तब हर व्यक्ति आप के साथ आ जायेगा। आपके विचार को स्वीकार कर लिया जायेगा। किन्तु इसके
         लिये शुरुआत तो आपको अकेले ही करना होगी।

             

         आज हम जितने भी सफल व्यक्तियों को देखते है ,जिनका बहुत बड़ा व्यापार है , बड़ी दुकान है , बड़ा
         कारखाना है ,बड़ी कंपनी है। तो आप पाएंगे उनमें से हर व्यक्ति ने अपने व्यापार की शुरुआत बहुत छोटे             रूप में वर्षो पहले की थी। या उनके दादा परदादा ने उस व्यवसाय की शुरुआत बहुत छोटे स्तर से की थी।
         और निरंतर प्रयास एवं कड़ी मेहनत के कारण वे आज इस मुकाम पर है। ऐसे कई उदाहरण आज हमारे
         सामने है।

         इसलिए हमें यह विचार अपने मन से निकालना होगा।,की मैं किसी काम को छोटे स्तर से चालू करता
         हूँ ,तो लोग मेरा मजाक उड़ाएँगे।  या मैं थोड़ा बेहतर होने का प्रयास करू , मैं थोड़ा और इन्तजार करू।
         कुछ लोग शुभ मोहरत का इन्तजार करते है। या अपनी कुण्डली में ग्रहो के चक्कर में फँस कर सही समय
         पर शुरुआत नहीं कर पाते है।

        साथियों ये निर्णय आप को करना है की आप क्या कर सकते है। अपनी क्षमता को आप को खुद पहचानना
        होगा। अगर आप को अपने आप पर विश्वास है। की आप किसी विशेष कार्य को पूरा कर सकते है , तो हर
        दिन ,हर महीना ,हर साल आपके लिये शुभ है। और अगर आप किसी कार्य को बिना मन के , केवल लोगों
        को दिखाने के लिये कर रहे है। तो आप कितना भी अच्छा मोहरत क्यूँ ना निकलवायें आपकी सफ़लता की
        कोई गारंटी नहीं है।

        मैं यह नहीं कहता की आप अपने धर्म के विपरीत हो जाइये या अपनी परम्पराये छोड़ दीजिए। मेरा
        तात्पर्य केवल इतना है ,की आप किसी अनचाहे डर को अपने आप पर इतना ना हावी होने दे। की वह
        आपकी सफ़लता में बाधक बन जाये।

       इसलिए दोस्तों अगर आप की कुछ योजनाएं है। तो एक अच्छा सा दिन देखकर जिस अवसर पर आप का
       दिल कहे। जिस भी इष्ट को आप मानते है उनका नाम लेकर पूजा -पाठ करके शुरुआत कर दीजिए। जब
       तक आप शुरुआत नहीं करेंगे तब तक आप को यह पता नहीं चलेगा की उस कार्य में क्या - क्या तकनीकी
       कठिनाइयाँ है। हो सकता है पहले कुछ दिन तक आपको लगे की आप असफल हो रहे हैं। या आप कुछ
       गलतियां कर रहे हैं। यही आपके सीखने की शुरुआत होगी।

       हम जब किसी व्यवसाय या व्यापार की योजना बनाते है। तो उसका आंकलन दूसरो के द्वारा किये गए
       कार्यो के आधार पर करते है। हमें लगता है की हमारी योजना बहुत बढ़िया है और उसमें कोई कमी नहीं
       है। हमारा यह विचार रहता है की हम इस व्यवसाय में इतना - इतना पैसा लगाएंगे और इतना कमाएंगे।
       किन्तु हमारे मन में सोची गई योजना और वास्तविक धरातल पर लागू योजना में काफी फर्क होता है।
       वास्तविक कठिनाइयों एवं समस्याओं का पता हमें कार्य चालू करने के पश्चात ही हो पाता है। तथा हमें
       उन कठिनाइयों को हल करते हुए आगे बढ़ना होता है।

       इसीलिये हम जितनी जल्दी शुरूआत करेंगे अपने प्रतिद्वन्दियों से उतने ही आगे रहेंगे। इसके अलावा
       यदि आप किसी अत्यन्त नये क्षेत्र में कार्य करने जा रहे है। और शुरुआत आप सबसे पहले कर देते है तो
       आप दूसरो के लिये एक रास्ता भी बनाकर चलते है। आपका अनुसरन करके ही अन्य लोग उस क्षेत्र में
       आते है। इस तरह आप उस विशेष क्षेत्र के लीडर बन जाते है। और उस क्षेत्र में टॉप पर रहते है।

       क्योंकि अगर आप सोच रहे है की आप के पास बहुत यूनिक आइडिया है। और वह  केवल आपके दिमाग
       की उपज है अन्य  कोई उस बारे में सोच भी नहीं पायेगा। और आप जब चाहे उस पर कार्य करें वह
       आइडिया केवल आप के पास ही रहेगा कोई दूसरा उस क्षेत्र में आप से पहले नहीं आ पाएगा। तो यह आपकी
       सबसे बड़ी भूल होगी। आज के प्रतिस्पर्धा भरे युग में हर व्यक्ति यूनिक आइडिया पर काम कर रहा है।
       आप के जैसी सोच हजारो लाखों लोगों की है। और आपके समान वह भी उस पर कार्य कर रहें है।

       अतः मेरी आप सभी को यही सलाह है की चाहे छोटी ही सही आप शुरुआत जल्दी करे। क्योंकि छोटे स्तर
       पर कार्य शुरू करने में रिस्क भी कम है और सीखने के लिये आपको समय भी मिल जायेगा। एक बार जब
       आप कार्य चालू कर देंगे तो आप देखेंगे आगे के रास्ते खुद ब खुद खुलते चले जा रहे है। और समस्याओं
       का हल भी आप आसानी से निकाल पा रहे है। इस प्रकार सारी बाधाओं को पार करके आप स्वतः सफलता
       के पथ पर आगे बढ़ते रहेंगे।


       इसके लिए आपको आज निर्णय लेना होगा। अभी निर्णय लेना होगा। अभी शुरुआत करनी होगी। 

       क्योंकि आप ने सुना होगा कल कभी नहीं आता इसलिए '' अभी नहीं तो कभी नहीं ''!

     

     

       


Thursday, November 1, 2018

शंख का महत्व (shankh ka vaigyanik aur dharmik mahatva in hindi )


      
 शंख का महत्व (shankh ka vaigyanik aur dharmik mahatva in hindi )

      हिन्दू धर्म में शंख का विशेष महत्व है। सनातन धर्म में प्राचीन काल से ही शंख को पूजा - पाठ एवं सुख
      समृद्धि के लिए उपयोग किया जाता रहा है। हम सब बचपन से मंदिरो में घरो में आरती एवं पूजा में शंख
      का प्रयोग देखते आ रहे है। यह एक ऐसी परम्परा बन चुकि है ,जिसका सैकड़ो वर्षो से पालन किया जा
      रहा है।

      किन्तु आज की युवा पीढ़ी शायद ही धार्मिक महत्व की इन वस्तुओं का प्रयोग करना जानती होंगी या
      उनके फायदों से परिचित होंगी। आज हम अपनी धार्मिक परम्पराओं से दूर होते चले जा रहे हैं। प्राचीनकाल
      में हमारे ऋषि मुनियों ने जिन परम्पराओं का विकास किया था ,वह पूर्णतः वैज्ञानिक आधार पर किया था।
      तथा समाज कल्याण एवं सनातन धर्म की रक्षा के उदेश्यों से किया गया था।

      इसीलिए आज हमारा यह कर्तव्य हो जाता है , की हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को इन नियमों से एवं
      उनके वैज्ञानिक महत्व से परिचित करवाये। ताकि वे भी उनका लाभ उठा कर अच्छा जीवन बीता सके।
      इसी क्रम में आज हम शंख के धार्मिक ,सामाजिक एवं वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालने ,तथा हमारे
      स्वास्थ्य , सुख - समृद्धि में उसके योगदान पर बात करेंगे।

     1. शंक का धार्मिक महत्त्व ( shankh ka mahatva in hindi ):

      हिन्दू वेदों एवं पुराणों के अनुसार शंख की उत्पति समुद्र मंथन से हुई है। समुद्र मंथन में प्राप्त 14 रत्नों 
      में से एक शंख भी है।  समुद्र मंथन से निकलने के पश्चात भगवान विष्णु द्वारा इसे धारण किया गया। 
      शंख के आगे के हिस्से में सूर्य एवं वरूण देव का वास होता है। जो घर में सकारात्मक ऊर्जा फैलाते है। 
      पौराणिक मान्यताओं के अनुसार शंख को लक्ष्मीजी का भाई माना जाता है। इसलिए जहाँ पर शंख की 
      पूजा की जाती है या उसे बजाया जाता है ,वहाँ पर स्वयँ लक्ष्मीजी का वास होता है। एवं सुख - समृद्धि की 
      प्राप्ति होती है। जिस घर में शंख की स्थापना की जाती है। अथवा नियमित रूप से सुबह - शाम उसे बजाया 
      जाता है , वहाँ सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है। 

      2. शंख के प्रकार ( Types of shankh ) :

       शंख मुख्य रूप से तीन प्रकार के पाय जाते है।  1 .  दक्षिणावर्ती शंख  2 .  मध्यावर्ती शंख 
       3 . वामावर्ती शंख  

       इनके अलावा इनके कई उप प्रकार भी पाए जाते है। 
       जैसे  : लक्ष्मी शंख , गोमुखी शंख , कामधेनु शंख , विष्णु शंख , देव शंख , चक्र शंख , सुघोष शंख ,
       गरुड़ शंख , मणिपुष्पक शंख , राक्षस शंख , कछप शंख , पांचजन्य शंख , अन्नपूर्णा शंख , मोती शंख 
       हीरा शंख , शेर शंख आदि। 

       इन सभी में दक्षिणावर्ती शंख अत्यन्त दुर्लभ होता है। दक्षिणावर्ती शंख को साक्षात लक्ष्मीजी का 
       स्वरुप माना गया है।  अगर आपके घर में दक्षिणावर्ती शंख है ,तो आप के यहाँ लक्ष्मीजी का सदा वास 
        रहता है। 

       3. स्वास्थ्य के लिए लाभ  ( Health Benefits of Sankh ) :

       शंख में गंधक ( Sulfur ), फॉस्फोरस ( Phosphorus )और कैल्शियम ( Calcium ) प्रचुर मात्रा में पाया            जाते है। इसलिए यह हमारे स्वास्थ्य के लिए विशेष लाभदायक है। शंख में रखे हुए जल को पीने से शरीर
       में कैल्शियम की कमी पूरी होती है। हिन्दू धर्म में पूजा के समय शंख में जल भरकर रखा जाता है। एवं 
       पूजा के पश्चात जल का आचमन किया जाता है। 

       इसके अलावा शंख का उपयोग अनेक प्रकार की आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में किया जाता है। 
       आयुर्वेद के अनुसार शंख भस्म ( Shankh Bhasma ) से पेट की बीमारियां , पीलिया ,पथरी  एवं 
       यकृत की बीमारियों को ठीक किया जाता है। 

       शंख बजाना फेफड़ो एवं हार्ट के लिए लाभदायक है  :

       शंख बजाने की जो प्रक्रिया है। जिसमे शंख को मुँह के पास रखकर उसमें जोर से हवा प्रवाहित की जाती 
       है। इस क्रिया में हमारे फेफड़ो एवं हार्ट का व्यायाम हो जाता है। शंख बजाने के लिये जब हम अपने फेफड़ो 
       को फुलाकर उसमें ज्यादा हवा भरते हैं। इससे हमारे फेफड़ो की कार्य क्षमता बढ़ जाती है। एवं शरीर में
       शुद्ध ऑक्सीजन ( Oxygen ) का प्रवाह बढ़ जाता है। जो स्वास्थ्य के लिये बहुत लाभदायक है। नियमित
       शंख बजाने वाले व्यक्ति को हार्ट एवं फेफड़ो से सम्बंधित बीमारियां नहीं होती हैं। 

      

      4.  शंख का वैज्ञानिक महत्व ( shankh aur Vigyan ) :

       1928 में बर्लिन यूनिवर्सिटी ने शंख ध्वनि का अनुसंधान करके यह सिद्ध किया की इसकी ध्वनि में
        कीटाणुओं को नष्ट करने की क्षमता है। शंख बजाने के दौरान उससे जो ध्वनि तरंगे उत्पन्न होती है।
        उनसे वातावरण में मौजूद अनेक बीमारियों के कीटाणु नष्ट हो जाते है। एवं वातावरण शुद्ध हो जाता है।
        शंख की ध्वनि हमारे मन से बुरे विचारो को निकालने में सहायक है। वैज्ञानिक अध्ययनों से यह सिद्ध
        हो चुका है की सूर्य की किरणे शंख की ध्वनि तरंगो में बाधक है। इसीलिए हिन्दू मान्यताओं के अनुसार
        सुबह एवं शाम को शंख बजाने की परम्परा है। इस समय सूर्य की किरणे निस्तेज होती है। तथा शंख
        ध्वनि अधिक दूर तक जाकर वातावरण को स्वच्छ कर पाती है। 
      

Sunday, October 21, 2018

सफलता के मूलमंत्र ( Success Mantra In Hindi )



 

       दुनिया में हर एक व्यक्ति सफल होना चाहता है। अपने एवं अपने परिवार को सुख समृद्धि से परिपूर्ण 
       देखना चाहता है। और अपने जीवन में निर्धारित किसी लक्ष्य को प्राप्त करना चाहता है। परन्तु 100
       में से केवल  5 व्यक्ति ही अपने जीवन में वास्तविक सफलता प्राप्त कर पाते है। बाकि के 95 लोग
       अपने लक्ष्य तक कभी नहीं पहुँच पाते है।

        तो क्या उन 5 प्रतिशत लोगों के पास सफलता का कोई विशेष मंत्र होता है। या फिर वो ऐसा क्या करते
        हैं , जो वो अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं। और अन्य व्यक्ति नहीं कर पाते। एक समान
        परिस्थियों में रहने के बावजूद उनमें से कुछ लोग सफलता की ऊँचाइयो को छू लेते हैं ,एवं कुछ लोग
        निराशा एवं अवसाद के गर्त में चले जाते है। और कुछ अपना सारा जीवन साधारण तरीके से गुजार देते
        हैं।

        इस विषय पर गहन विचार एवं अध्ययन करने बाद ,हमने कुछ ऐसे सिद्धन्तों एवं नियमो की खोज की
        है। जिसका पालन करके हर व्यक्ति जीवन में सफलता एवं अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है। और
        जिनका पालन सभी बड़े और सफल व्यक्ति द्वारा किया जाता है।

        1.  सकारात्मक सोच  ( Positive thinking ) :

         सफलता का सबसे पहला मंत्र या सिद्धांत है ,   " सकारात्मक एवं बड़ी सोच " जिस भी व्यक्ति का 
         किसी कार्य को देखने नजरिया Positive होता है ,जो हर समय अपने अन्दर सकारात्मक विचारों 
         को जगह देता है।  जीवन से जुड़ी हर छोटी बड़ी समस्या में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाता है। एवं 
         उन्हें हल करने की कोशिश करता है। दूसरो के प्रति अच्छा भाव रखता है। वह व्यक्ति बहुत जल्दी 
         सफलता को प्राप्त कर लेता है।

        2.  स्वस्थ्य दिनचर्या एवं अच्छा स्वास्थ्य  (Good health and good lifestyle ) :

          
          सफलता के लिए दूसरा सबसे बड़ा सिद्धान्त है , अच्छा स्वास्थ्य।  यह एक ऐसा विषय है, जिसे 
          ज्यादातर लोग अनदेखा कर देते है। किन्तु यह हमारी कामयाबी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। 
          क्योंकि अगर आपके पास किसी बिज़नेस के लिए अच्छा आइडिया है ,पैसा भी है और जोश भी है। 
          किन्तु आपका स्वस्थ्य ठीक नहीं है या आपका शरीर साथ ना दे तो आप क्या करेंगे।  

          स्वास्थ्य एक ऐसी दौलत है जो पैसे से नहीं खरीदी जा सकती है। और एक स्वस्थ्य शरीर के अन्दर 
          ही स्वस्थ्य मन का निवास होता है। सफलता एक या दो दिन में नहीं प्राप्त की जा सकती है। इसके 
          लिए लगातार प्रयास करना होता है। इसमें लम्बा समय भी लग सकता है। 
     
          और इस दौरान आपका शारारिक एवं  मानसिक रूप से स्वस्थ्य रहना जरुरी है। इसलिए आप सबसे 
          पहले अपने आप से प्यार कीजिए। अपने खुश एवं स्वस्थ्य रखिये ,तभी आप अपने जीवन के लक्ष्य 
          को भी प्राप्त कर पाएंगे। 
       

                जरूर पढ़े : शंख का धार्मिक एवं वैज्ञानिक महत्व

         3.  समय का सदुपयोग  ( Time management ) :

           सफलता का तीसरा सिद्धान्त है ,समय का सदुपयोग। जो भी व्यक्ति अपने जीवन में समय का सही
           उपयोग करता है। तथा समय का प्रबन्धन करना जानता है ,वह सफलता को जल्दी प्राप्त कर सकता
           है। आजकल बड़ी -बड़ी कंपनिया Time management पर ज्यादा ध्यान दे रही है। और अपने उत्पादन
           में वृद्धि कर रही है।

           आज के दौर में मानव के लिए अगर सबसे अमूल्य कोई चीज है ,तो वह उसका समय है। कुछ लोग
          अपना सारा समय व्यर्थ के कामों में बीता देते है। वह जीवन में कभी सफलता नहीं प्राप्त कर पाते हैं।
          अगर आप में किसी कार्य को टालने या आलस्य दिखाने की प्रवृति है ,तो निश्चित ही आप अपने लक्ष्य
          को कभी प्राप्त नहीं कर पाएँगे।

          समय का पालन करने से आप के कार्यक्षेत्र में आपकी छवि बेहतर बनती है।  लोग आप पर विश्वास
          करते है। वे आपके साथ कार्य करना चाहते है। इसके विपरीत अगर आप अपने कार्य के प्रति लापरवाह
          है ,समय पर कार्य पूरा नहीं करते है। इससे आप की छवि ख़राब होती है। इसलिए अगर आप को अपने
          लक्ष्य को प्राप्त करना है। तो आपको समय का सही उपयोग करने की कला सीखनी होगी।

         4. अच्छे पारिवारिक एवं सामाजिक रिश्ते  ( Good relationship ) : 

          यदि आपके पास बहुत पैसा है। किन्तु आपके पारिवारिक एवं सामाजिक रिश्ते ठीक नहीं है ,या उनमें 
          तनाव है। तो वह पैसा आपके किसी काम का नहीं। हम अपने जीवन में अनेक प्रकार रिश्तों में बँधे हुए 
          होते है। हर इंसान को कुछ रिश्ते सारी उम्र निभाना पड़ता है। या यूँ कहे वो रिश्ते हमारे जीवन का 
          अभिन्न अंग होते है। हमारे जन्म से लेकर मृत्यु तक रिश्तों का यह सफर चलता रहता है। इसीलिये 
          किसी भी सफल व्यक्ति के लिए रिश्तों का विशेष महत्व है। 

          अगर आप सफल है। तो यह सूचित करता है की आपके अपने परिवार और समाज में भी अच्छे रिश्ते 
          या Relationship हैं। तभी आप सफल है। अन्यथा यह आपकी सफलता में कहीं ना कहीं बाधक जरूर 
          बन सकते है। हम सभी ने कुछ कहावतें कितनी बार सुनी होंगी जो इन रिश्तों के महत्व को ही  अच्छी 
          तरह से परिभाषित करती है। 

          जैसे - " हर सफल व्यक्ति के पीछे किसी महिला का हाथ होता है। " या " मेरी सफलता में उस व्यक्ति 
          का बहुत योगदान है "
         
          सरल  भाषा में कहा जाय तो हमारी सफलता या असफलता के पीछे हमारे रिश्तों का विशेष महत्व है। 

        4.  व्यापारिक एवं पारिवारिक खर्चों का हिसाब रखना  ( Accounting ) :

       
         पाँचवा और आखिरी मन्त्र जो आपकी सफलता के लिए बहुत ज्यादा जरुरी है। वह है ,अपने खर्चो 
         का एवं आय का हिसाब रखना। 

         दोस्तों अगर हम अपने जीवन में कोई बड़ा व्यापार या संगठन खड़ा करना चाहते है। अपनी खुद की 
         कम्पनी का मालिक बनना चाहते है या अपने छोटे व्यवसाय को बड़ा रूप देना चाहते है। तो यह तभी 
         संभव है। जब पहले दिन से ही हम अपनी आवक - जावक का अर्थात आय और व्यय का लिखित 
         हिसाब रखेंगे। इसके बिना आप कुछ समझ ही नहीं पाएंगे क्या कमाया और क्या खर्च किया। व्यापार 
         में लाभ हुआ या हानि। 
         Accounting का विषय बहुत महत्वपूर्ण है। बड़ी -बड़ी कम्पनियो में इसके लिये एक पूरा विभाग अलग 
         से होता है। आप सोचेंगे मेरे व्यवसाय की तो अभी शुरुआत हुई है या मेरा व्यवसाय तो बहुत छोटा है। 
         और उसके आय और व्यय का हिसाब में मुँहजबानी याद रख सकता हूँ। उसे लिखने की क्या जरुरत है। 

         लेकिन मित्रों भले आप की चाय की दुकान या आप महिला है और घर पर कपड़े सिलती है। या आप 
         एक किसान है। हर एक व्यक्ति को अपने पारिवारिक और व्यापारिक खर्चो का हिसाब रखने की आदत 
         डालनी चाहिये। तभी आप भविष्य की योजनाए बना पाएंगे और आगे बढ़ पाएंगे। 
        
         अगर आप का व्यवसाय छोटा है तो आप एक छोटी नोटबुक या डायरी में अपने दैनिक खर्चो और आय 
         का हिसाब रखे। और माह के अंत में तथा वर्ष के अंत में उसका अध्ययन करे। यह सबसे सही तरीका है। 
         इससे आपको अपने व्यापार के लिए नई योजनाए बनाने में मदद मिलती है। और आप  कहाँ पर 
         अनावश्यक खर्च कर रहे है , पता चलता है। तथा आप किन खर्चो में कटौती करके नई योजनाओ के 
         लिए पैसे की व्यवस्था कर सकते है। लगातार एक वर्ष तक हिसाब रखने पर ही आपको पता चल जायेगा 
         की आपके घर खर्चो के लिए आप को मासिक कितने रुपयों की जरुरत पड़ती है। 

         मौखिक रूप से आप ज्यादा से ज्यादा तीन या चार दिन तक का हिसाब याद रख सकते है इससे ज्यादा 
         नहीं। चाहे आपकी याददाश्त कितनी भी अच्छी हो। 

         इसलिए अगर आप को सफलता प्राप्त करना है तो आप को  Accounting की आदत डालनी ही पड़ेगी। 


         इस तरह इन नियमों का पालन करके आप सफलता को प्राप्त कर सकते है। 
          

   
        

        

Sunday, October 14, 2018

सफलता के सूत्र हिंदी (success mantra in hindi)


       
 

     सफलता के सूत्र हिंदी (success mantra in hindi)

       जी हाँ , दोस्तों हम अपनी सफलता या असफलता के पीछे कई कारण गिनाते हैं। या यूँ कहे बहाने 
       गिनाते हैं। जैसे -
  •         मुझे अच्छी शिक्षा नहीं मिल पाई। 
  •        मेरी गरीबी मेरी असफलता का कारण है। 
  •         मेरा धर्म या जाति मेरी सफलता  में बाधक है। 
  •        मेरी हाइट अच्छी नहीं है। 
  •         मेरा रँग काला है। 
  •         में एक महिला हूँ , क्या कर सकती हूँ। 
  •         मेरा स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता। 
  •         मेरी किस्मत अच्छी नहीं है। 
  •        मैं कई बार असफल हो चुका हूँ। आदि 
      दोस्तों इन कारणों की लिस्ट बहुत लंबी है। पर क्या आपको पता है, आपकी सफलता या असफलता
      के पीछे इनमें से एक भी कारण जिम्मेदार नहीं है। ये केवल और केवल बहाने हैं। इसके अलावा कुछ
      नहीं है।

     अगर हमारी सफलता या असफलता के के लिए कोई चीज सच में जिम्मेदार है , तो वो है आपकी  सोच
      कैसी है।
           

       1. सकारात्मक   ( positive )     या     2. नकारात्मक    ( negative )

    
      जी हाँ ! दोस्तों केवल ये 2 चीजें ही हम में से हर एक को जीवन में ऊँचाइयो पर या जमीन पर लाने 
      में अहम भूमिका निभाती है।दुनिया में आज जो भी बड़े - बड़े लोग है उनकी बड़ी और   positive
      सोच ने ही उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया है। 
      केवल उनकी बड़ी सोच, बड़ा लक्ष्य, बड़ा सपना ही उन्हें सफलता की नई ऊँचाइयो पर पहुंचा पाया 
      है। 
      दोस्तों हर व्यक्ति के जीवन में कुछ ना कुछ समस्याये ,कठिनाइयाँ या परेशानिया रहती है। अगर 
      आप ढूँढने निकले तो आपको ऐसा एक भी व्यक्ति इस पृथ्वी पर नहीं मिलेगा जिसके जीवन में कोई 
      समस्या या कठिनाई ना हो। अब यह आप पर निर्भर करता है की आप उन परिस्थितियों को हराकर 
      अपने लिए अच्छी परिस्थितियों का निर्माण कैसे करते हैं। 
      इसके लिये सबसे जरुरी है ,की आपकी सोच सकारात्मक (positive) हो। आपके विचार उच्च हो। 
      आपका सपना बड़ा हो। आपका लक्ष्य (Goal) इतना बड़ा हो, की उसके आगे हर समस्या छोटी लगे। 

      दोस्तों इस दुनिया में हर व्यक्ति के अन्दर ये दोनों प्रकार के विचार पाये जाते हैं। चाहे वो बड़ा इंसान 
      हो या गरीब। 

      1. सकारात्मकता (Positive thinking)   2 . नकारात्मकता ( Negative thinking )

      अब आप इनमें से किसे ऊपर रखते हैं ,अच्छे विचारों  को या बुरे विचारों को। अगर आपको जीवन में 
      कुछ बड़ा करना है ,तो आपको हमेशा positive सोच ही रखना होगा। 

      अपना नजरिया हमेशा  Positive रखें। 

     इसके लिये आपको अपने आस - पास सकारात्मक माहौल बनाना होगा। बुरे विचारों को मन से    
     निकालकर बाहर फेंकना होगा। अपने आप से ये शब्द कहना होगा   
     
     1.   आपके जीवन में जो भी घटनाएँ घटी हैं ,या जो कुछ भी अतीत में हुआ है।  वह आपके अच्छे 
      के लिये ही हुआ है। ईश्वर ने जो किया है आपके अच्छे के लिए ही किया है। 
      2.  आपके साथ वर्तमान में जो हो रहा है , आपके अच्छे के लिये ही हो रहा है। 
      3.  भविष्य में जो आपके साथ होगा अच्छा ही होगा। ईश्वर आपको सही रास्ते पर ले जाएंगे। 

     इस तरह आपको अपने भूत,भविष्य और वर्तमान को सकारात्मक दृष्टि से देखना होगा। 
     आप देखेंगे जैसे - जैसे आप अपने अन्दर अच्छे विचारों को जगह दे रहे हैं , आपके आस - पास का 
     माहौल बदल रहा है। आपकी कठिनाईयाँ परेशानिया छोटी होती चली जा रही  हैं। आपकी जिन्दगी में 
     बहुत तेजी से बदलाव आ रहा है। और आगे के रास्ते खुद ब खुद खुलते चले जा रहे हैं। आपका जीवन 
    स्तर सुधर रहा है ,आपके  सामाजिक  रिश्ते अच्छे बन रहे हैं। आप अपनी जिम्मेदारियों को अच्छी से 
    निभा पा रहे हैं। आपके परिवार में खुशहाली बड़ रही है। आपका आर्थिक स्तर ऊँचा हो रहा है। सब कुछ 
    अपने आप आपको हासिल हो रहा है। 
   
    जी हाँ ! दोस्तों आपकी जिन्दगी में ये मायने नहीं रखता की आप गरीब हैं या अमीर ,आपने अच्छी 
    शिक्षा प्राप्त की या नहीं , आपका रंग गोरा है या काला , आपकी हाइट ऊँची है या नीची ,आप स्त्री है 
    या पुरुष ,आपकी उम्र कम है या ज्यादा ,आपका धर्म या जाति क्या है। 

    अगर कोई चीज़ मायने रखती है तो वो है आपकी सोच !
    अगर आपकी सोच बड़ी और अच्छी है तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता। 
    और अगर आपकी सोच छोटी और गलत है ,तो आपको असफल होने से कोई नहीं रोक सकता। 
    इसलिए दोस्तों मेरा आप सभी से यही अनुरोध है ,की अपनी जिन्दगी को सकारात्मक (Positive )
    तरीके से जिये। और सफ़लता की नई ऊंचाईयों को छुये। 



     
     

Thursday, October 11, 2018

तीन मजदूरों की प्रेरणादायक कहानी (Motivational Story in Hindi)


                      


      तीन मजदूरों की प्रेरणादायक कहानी (Motivational Story in Hindi)
      एक समय की बात है। एक राज्य में वहाँ के राजा द्वारा मन्दिर का निर्माण करवाया जा रहा था। 
      वहाँ पर तीन मजदूर पत्थर तोड़ने का काम कर रहे थे। तभी वहाँ एक घुड़सवार आता है। और 
      मजदूरों को देखकर रुक जाता है। 

      वह सबसे पहले मजदूर के पास जाता है ,और पूछता है " भाई ये क्या कर रहे हो "
      तो वह मजदूर गुस्से से घुड़सवार की ओर देखकर कहता है " देख नहीं रहे हो ,अपनी किस्मत 
      फोड़ रहा हूँ। माँ -बाप ने पढ़ाया लिखाया नहीं ,इसलिये आज यहाँ पत्थर तोड़ रहा हूँ। "
      इतना कहकर वह जोर -जोर से पत्थर तोड़ने लगता है। 
      
      वह व्यक्ति दुसरे मजदूर के पास जाता है। और पूछता है " भाई ये क्या कर रहे हो "
      वह मजदूर अपना काम रोककर कहता है " भाई मैं यहीं पास के गाँव में रहता हूँ , अपने परिवार 
      को चलाने के लिए मजदूरी करता हूँ। यहाँ से जो पैसा मिलता है ,उससे मेरा घर - परिवार  चल 
      जाता है। "
    
      अंत में वह घुड़सवार तीसरे मजदूर के पास जाता है। जो बहुत ख़ुश होकर , गुनगुनाते हुए  हथौड़े 
      पत्थर तोड़ रहा था। और अपने काम में बहुत मगन था। वह उससे भी वही सवाल पूछता है ,
      " भाई ये क्या कर रहे हो "
      
      तो वह मजदूर उस व्यक्ति की ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहता है " भाई मैं एक बहुत बड़ा काम 
      कर रहा हूँ। क्या तुम्हें पता है ,जिन पत्थर को मैं तोड़ रहा हूँ उन पर नक्काशी की जाएगी। और 
      उन्हें इस विशाल  मन्दिर में लगाया जाएगा।  हजारो लोग यहाँ पर ईश्वर की प्रार्थना करने आयेगे। 
      यह सौभाग्य है ,की मुझे यहाँ पर काम मिल गया। मुझे इस बात पर गर्व है। 
      यह मन्दिर सदियों तक यहाँ रहेगा , मैं बड़े होने पर अपने बच्चों को जब बताऊँगा की इस मन्दिर 
      के निर्माण में मेरा भी छोटा सा योगदान है। तो वह कितना ख़ुश होंगे। "
      इतना कहकर वह मजदूर गुनगुनाते हुए , फिर पत्थर तोड़ने लगता है। 
  
      तीनों की बातें सुनकर घुड़सवार वहाँ से चल देता है। और सोचने लगता है की तीनों एक ही काम 
      कर रहे है। पर तीनों की सोच कितनी अलग है। 


     Moral of Stories  दोस्तों इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है। की हजारों 
     लोग है ,जो मन मारकर ,जिन्दगी को बोझ समझकर अपना जीवन गुजार देते है। अपनी जिम्मेदारी 
     को बोझ समझते हैं। और यही गुण हमारे बच्चों में भी आ जाते हैं। और उनका जीवन भी हमारी 
     तरह नीरस हो जाता है। हम जीवन को किसी सज़ा की तरह काटते हैं। 
     
    या वास्तव में अपने जीवन का आनंद लेना चाहते हैं। दोस्तों इस पृथ्वी पर जन्म लेने वाले हर मनुष्य 
    को अपने जीवन- यापन के लिए ,कुछ ना कुछ काम काम तो करना ही पड़ता है। अब यह हमारे 
    ऊपर निर्भर करता है ,कि हम उस काम को खुश होकर करते हैं या दुखी होकर।